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पन्द्रह वर्ष संघर्ष के बाद दैनिक वेतन भोगी को मिला न्याय रिक्त पद न होने पर नवीन पद सृजित कर नियमितिकरण का आदेश

अरुण त्रिपाठी
रतलाम,27 अगस्त| ;अभी तक;  मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमुर्ति एस.ए. धर्माधिकारी ने दैनिक वेतनभोगी वाहन चालक प्रेमसिंह पिता कल्याणजी की याचिका स्वीकार की है | इसमें एक महत्वपुर्ण आदेश पारित कर प्रेमसिंह को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर 10 वर्ष सेवापूर्ण होने पर नियमितिकरण हेतु पात्र मानकर वाहन चालक के पद पर नियमित किये जाने का आदेश दिया है |
                             यह भी आदेशित किया गया कि पद रिक्त न होने की दशा में अन्यत्र वाहन चालक के पद पर नियमित किया जावे या नया पद सृजित कर प्रेमसिंह को वाहन चालक के पद पर नियमित किया जावे। अधिवक्ता प्रवीण कुमार भट्ट ने बताया कि प्रेमसिंह के नियमितिकरण के मामले में मध्यप्रदेश शासन व जिला पंचायत द्वारा रिक्त पद नहीं होने के कारण नियमितिकरण नहीं किये जाने के 15 सितंबर 2015 के आदेश को न्यायालय ने निरस्त कर दिया​प्रेमसिंह पिता कल्याणजी जिला पंचायत रतलाम में 20 अगस्त1993 से निरंतर वाहन चालक के पद पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत् है। उसके द्वारा नियमितिकरण हेतु प्रथम याचिका वर्ष 2009 में प्रस्तुत की गई थी जिसमें 23 दिसंबर 2009 को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा प्रेमसिंह के नियमितिकरण करने हेतु विचार करने के आदेश दिये गए थे|
                               इसके बाद याचिका फिर प्रस्तुत की गई, जिसमे उच्च न्यायालय इंदौर ने नियमितिकरण हेतु विचार करने के आदेश दिये थे,परंतु जिला पंचायत ने प्रेमसिंह की अवमानना याचिका के पश्चात् दिनांक 15 सितंबर 2015 को आदेश जारी कर वाहन चालक का रिक्त पद न होने के आधार पर प्रेम सिंह की नियमित करने की प्रार्थना को निरस्त कर दिया और चतुर्थ श्रेणी के पद पर सहमति दिये जाने पर नियमित किये जाने हेतु विचार करने के आदेश दिये थे | इससे व्यथित होकर प्रेमसिंह ने उच्च न्यायालय इंदौर में वर्ष 2016 में याचिका प्रस्तुत की थी| उक्त याचिका में उच्च न्यायालय ने दिनांक 23 अगस्त 2023 को याचिकाकर्ता के अभिभाषक के तर्क श्रवण करने के उपरांत प्याचिका को स्वीकार कर प्रेमसिंह को सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट आफ कर्नाटक विरूद्ध उमादेवी के प्रकरण में प्रतिपादित न्याय सिद्धांत के आधार पर 10 वर्ष सेवा पुर्ण होने पर नियमितिकरण हेतु पात्र होना मानकर मध्यप्रदेश शासन व जिला पंचायत को आदेशित किया कि प्रेमसिंह को वाहन चालक के पद पर 30 वर्ष दी गई सेवाओं के आधार पर नियमित किया जावे एवं पद रिक्त न होने पर अन्यत्र विभाग में या नया पद सृजित कर प्रेमसिंह का वाहन चालक के पद पर नियमितिकरण किया जावे। प्रकरण में प्रेमसिंह की पैरवी अधिवक्ता प्रवीण कुमार भट्ट ने की।

 

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