पति-पत्नी का हुआ मिलन तेरा सात का ऐसा योग की बिछडे हुए फिर मिले

9:42 am or July 14, 2019
पति-पत्नी का हुआ मिलन तेरा सात का ऐसा योग की बिछडे हुए फिर मिले

महावीर अग्रवाल

मंदसौर १४ जुलाई ;अभी तक;  परवीन पिता मुबारिक निवासी मुल्तानपुरा का निकाह जावेद निवासी इंदौर के साथ संपन्न हुआ तीन लडकियां होने पर मारपीट कर घर से निकाल दिया था। परवीन ने अपने अभिभाषक  श्री सैलानी ए.के. मंसूरी एवं ए. आर. मंसूरी एडवोकेट से संपक्र किया जिनके द्वारा न्यायालय में कार्यवाही की गई, विपक्षी के नोटिस तामिल होते ही दोनों  पक्षो को न्यायाधीश लखनलाल गर्ग प्रधान न्यायाधीश मंदसौर व अभिभाषक सैलानी ए. के. मंसूरी, ए. आर. मंसूरी एडव्होकेट ने समझाया और टूटते हुए घर को फिर से बसाया लंबे समय से पति – पत्नी साथ रह रहे है ।
पति-पत्नी का हुआ मिलन तेरा सात का ऐसा योग की बिछडे हुए फिर मिले

पति-पत्नी का हुआ मिलन तेरा सात का ऐसा योग की बिछडे हुए फिर मिले

इसी प्रकार हेमा चौहान का विवाह महू निवासी सचिन के साथ हुआ। विवाह पश्चात कुछ बातों को लेकर मनमुटाव हो गया जिस कारण हेमा के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया था। जिसमें एडवोकेट मो. अकबर अुरैशी, रमेश गुप्ता व तेजकरणसिंह गेहलोद व न्यायाधीश श्रीमान लखनलाल जी गर्ग प्रधान न्यायाधीश महोदय, मंदसौर पूर्व  न्यायाधीश श्री चुण्डावत व अभिभाषक सौलानी ए. के. मंसूरी, ए. आर. मंसूरी, एडवोकेट ने समझाया और टुटते हुए घर को फिर से बसाया। उक्त प्रकरण में विशेष रूप् से माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री तारकेश्वरसिंह साहब ने समझाईश में योगदान रहा और बिछडे हुए परिवारों का मिलाया।

               इसी प्रकार मोना का विवाह हितेश परमार निवासी बडोदा के साथ हुआ था, कुछ बातों को लेकर एक वर्ष से दोनो पति पत्नी अलग हो गए ेथे। जिनकी ओर से न्यायालय में घरेलु हिंसा व 125 की कार्यवाही मंसूरी अभिभाषक द्वारा की गयी। हितेश विपक्षी को  न्यायिक दण्डाधिकारी महोदय, प्रथम श्रेणी श्रीमती मंजूसिंह एवं ट्रेनिंग जज देशाना जैन एवं  वैशाली पटेल व अभिभाषक, श्री सैलानी ए.के. मंसूरी एवं ए. आर. मंसूरी एडवोकेट, मो. इकबाल मंसूरी एडव्होकेट, माथुर एडवोकेट एवं भावना कुमावत एडवोकेट, अनामिका जैन ने समझाया और टूटते हुए घर को फिर से बसाया। इसी प्रकार विधि नीता ने अपने पति बाडमेर राजस्थान निवासी जितेन्द्र एवं उसके  पिता के विरूद्ध प्रकरण न्यायालय में लगाये। जिसमें बाडमेर से जितेन्द्र को पेशी करने के  लिए आने  में काफी दिक्कत परेशानियों होती थी और वह शारीरिक रूप् से बीमार व कमजोर हो गया था, प्रधान न्यायाधीश लखनलाल जी गर्ग साहब अभिभाषक कैलाशचन्द्र शर्मा, नेपालसिंह श्री सैलानी ए. के. मंसूरी एवं ए. आर. मंसूरी एडवोकेट, के  प्रयास से आपकी  राजीनामा कर मध्यस्थता के माध्यम से साथ रहने  के लिए भेजा था, उसके पश्चात दोनों ने स्नेहपूर्व वातावरण में गिले शिकवे भूल कर जीवन भर साथ रहने का निर्णय किया।

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