छोटेलाल सरावगी, अपने मुस्लिम दोस्त फकीर मोहम्मद को भेज रहे हज में

2:57 pm or July 13, 2019
छोटेलाल सरावगी, अपने मुस्लिम दोस्त फकीर मोहम्मद को भेज रहे हज में

मोहम्मद सईद 

शहडोल 13 जुलाई अभीतक। शोले फिल्म के जय और वीरू की जोड़ी तो आपको याद ही होगी। इस फिल्मी दोस्ती के किस्से आज भी लोगों की जुबां में यदा-कदा आ ही जाते हैं। इन दोस्तों ने फिल्म में एक गाना भी गाया था, कि ये दोस्ती हम नहीं तोडे़ंगे, तोड़ेग दम मगर तेरा साथ नहीं छोड़ेंगे। कुछ इसी तरह की जय और वीरू मिसाल है, शहडोल क्षेत्र के जाने माने कोयला व्यवसायी व पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी और बुढ़ार में रहकर साधारण सा जीवन व्यतीत करने वाले फकीर मोहम्मद की दोस्ती। श्री सरावगी ने अपने बाल सखा फकीर मोहम्मद को हज यात्रा में भेजने का निश्चय किया। इसके लिए न उन्होंने पासपोर्ट बनवाने से लेकर सभी कागजी कार्यवाही पूरी कराई और हज का पूरा खर्च भी श्री सरावगी ही वहन कर रहे हैं। प्रसन्नता की बात तो यह है, कि फकीर मोहम्मद का नाम भी हज के लिए पहली बार में ही निकल आया। वे 15 जुलाई को अंबिकापुर-जबलपुर टेªन से बुढ़ार से पहले जबलपुर जाऐंगे और जबलपुर से गरीब रथ से मुंबई जाएंगे। 18 जुलाई को वे हवाई जहाज से पवित्र शहर मक्का-मदीना के लिए प्रस्थान करेंगे।
लखेरन टोला वार्ड क्रमांक 11 बुढ़ार निवासी फकीर मोहम्मद बाजार में सड़क के किनारे बैठकर चूड़ी बेचने का काम करते हैं और उन्होंने कभी ऐसा सोंचा भी नहीं था कि उनका कोई दोस्त उनके लिए इस तरह का काम कर सकता है। 70 वर्षीय फकीर मोहम्मद अपने बाल सखा के इस सहयोग से बेहद प्रफुल्लित हैं। फकीर मोहम्मद ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके दो पुत्र और दो पुत्री हैं जिनकी शादी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी का लगभग पांच वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। उनका यह भी कहना है कि उनके दोस्त ने उन्हें जो तोहफा दिया है वह उनके लिए अनमोल है।

कक्षा 1 से 10 वीं तक साथ की पढ़ाई

सोहागपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक छोटेलाल सरावगी जनमानस के बीच खुद्दी भईया के नाम से लोकप्रिय हैं और समाज सेवा के क्षेत्र में उनकी अग्रणी भूमिका भी रहती है। खुद्दी भईया ने अभीतक न्यूज से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने और फकीर मोहम्मद ने कक्षा 1 से 10 वीं तक साथ साथ पढ़ाई की और बाद में भले ही दोनों अपने अपने काम धंधे में चले गए हों लेकिन दोनों की बीच दोस्ती आज भी उसी तरह से ही है जो बचपन में थी। उन्होंने बताया कि चाहे हमारी होली, दीपावली या अन्य कोई त्योहार हो फकीर मोहम्मद हमारे घर आने से नहीं चूकते थे और ईद व अन्य त्यौहारों में हम उनके घर जान नहीं भूलते थे। श्री सरावगी ने बताया कि सुबह हम लोग नियमित मिलते थे।
उन्होंने बताया कि फकीर मोहम्मद को दोस्तों के बीच बादशाह के नाम से पुकारा जाता था और लगभग चार-पांच महीने पहले बातों ही बातों में मैने कहा कि यार बादशाह तुम हज में क्यों नहीं चले जाते। इस पर बादशाह ने कहा कि क्या मजाक कर रहे हो, मुझ जैसा आर्थिक रूप से कमजोर आदमी कैसे हज में जा पाएगा। श्री सरावगी ने कहा कि बस उसके बाद ही मैने ठान लिया कि बादशाह को मै हज पर भेजूगा और उसके बाद ही मैं सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में जुट गया। श्री सरावगी ने कहा कि मेरा प्रयास मानो खुदा को भी मंजूर था और पहली बार में ही बादशाह का नाम हज के लिए चयन हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि मैं तो बस इतना जानता हूं कि मजहब नहीं सिखाता आपस मंे बैर रखना, हिन्दी हैं हमवतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा।

छोटेलाल सरावगी, अपने मुस्लिम दोस्त फकीर मोहम्मद को भेज रहे हज में

छोटेलाल सरावगी, अपने मुस्लिम दोस्त फकीर मोहम्मद को भेज रहे हज में

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