डीएनए के लिए गये सेम्पल की मार्किंग में भिन्नता, फांसी की सजा के लिए आया प्रकरण होईकोर्ट ने संबंधित न्यायालय को लौटाया 

सिद्धार्थ पाण्डेय

जबलपुर ११ जुलाई ;अभी तक;  षहडोल जिला न्यायालय ने 11 साल की मासूम बच्ची से बलात्कार कर हत्या करने वाले आरोपी को दोहरे मृत्युदण्ड की सजा से दण्डित किया था। जिला न्यायालय ने मृत्यु दण्ड की पुष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट भेजा था। हाईकोर्ट जस्टिस जे के महेष्वरी व जस्टिस अंजुली पालो ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि एफएसएल की तरफ से डीएनए जांच के लिए जिन चीजों के सेम्पल जिस मार्किंग के साथ भेजे गये थे,डीएनए रिपोर्ट में उनकी मार्किंग बदली हुआ था। याचिका की सुनवाई के दौरान ष्षासन की तरफ अतिरिक्त साक्ष्य पेष करने आवेदन दायर किया गया था। जिसे स्वीकार करते युगलपीठ ने प्रकरण को नीचली अदालत में वापिस करते हुए निर्देषित जारी किये है कि डीएनए विषेषज्ञ का वयान दर्ज करे। युगलपीठ ने दो माह की समय अवधि में  प्रकरण में वापस हाईकोर्ट भेजने के निर्देष जारी किये है।
गौरतलब है कि षहडोल जिला न्यायालय ने 6 मार्च को 11 साल की बच्ची के साथ बलात्कर कर उसकी हत्या करने के अपराध में रामनाथ केवट उम्र 28 साल को दोहरी फांसी क सजा से दण्डित किया था। उस पर आरोप था कि 6 वीं क्लास में पढने वाली बच्ची का 9 जून 2015 को अपहरण कर बलात्कार किया। इसके बाद उसकी हत्या कर उसके ष्षव को भूसे के ढेर में दबा दिया था। प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेष किये गये साक्ष्य व डीएनए रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को मृत्यु दण्ड की  सजा से दण्डित की पुष्टि के लिए प्रकरण को हाईकोर्ट भेजा था। इसके अलावा आरोपी ने भी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी।
याचिका की सुनवाई आरोपी की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि एफएसएल की तरफ से डीएनए जांच के लिए जिन चीजों के सेम्पल जिस मार्किंग के साथ भेजे गये थे,डीएनए रिपोर्ट में उनकी मार्किंग बदली हुआ था। इसके अलावा नीचली अदालत ने डीएनए विषेषज्ञ के वयान नहीं हुए थे। जिसके बाद ष्षासन ने अतिरिक्त साक्ष्य पेष करने के लिए आवेदन पेष किया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने उक्त आदेष जारी किये।

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