अंधे कत्ल के दो मामलो में फरार दोषसिद्ध आरोपी को हूआ आजीवन कारावास

महावीर अग्रवाल

मंदसौर २० जून ;अभी तक;  तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश रूपेश कुमार  मदंसौर के द्वारा दोहरे अंधे कत्ल के आरोप में फरार दोषसिद्ध आरोपी धमेंद्र पिता भारतसिंह, नि0 लसूडियाईला, जिला मंदसौर को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 5000/-रूपये जुर्माने से दण्डित किया एंव धारा 395 भादवि में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000/- रूपये जुर्माने से दण्डित किया गया ।

उप संचालक अभियोजन बापुसिंह ठाकुर ने बताया की दिंनाक- 6.8.12 को सोहनसिंह ने थाना वायडी नगर पर पहूच कर बताया की वह अपने किसी काम से एलआईसी आॅफिस के पास से होते हूए मण्डी जा रहा था। तभी वहां झाडियों में एक व्यक्ति की लाश दिखी जिसकी सूचना उसने थाने पहूंचकर दी। पुलिस वायडी नगर के द्वारा मौके पर पहूचकर लाश की तस्दीक की जो ट्रक नंबर- एमपी/14/जेए/0943 के क्लीनर की होना पायी गई, कुछ दूरी पर ही ट्रक के चालक की भी लाश मिली। सोहनसिंह की रिपोर्ट से पुलिस वायडी नगर के द्वारा अपराध क्र. 399/2012, धारा 302 भादवि का अपराध दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया । अनुसंधान के दौरान पाया गया की आरोपी धमेंद्र ने अपने साथीयों के साथ मिलकर, कृषि उपज मंडी मदंसौर से ट्रक नंबर- एमपी/14/जेए/0943 जो कि कुल- 225 बोरी गेंहू लाद कर चला था जो कुछ दूरी पर खडा था को लुटने के आशय से अपने अन्य 5 साथीयों के साथ चालक व क्लीनर की धारदार हथियारों से दोंनो की हत्या कर झांडियों में शव फंेद दिए गए । अपराध की पतारसी व मौके से मृतक व धमेंद्र की काॅल डिटेल के आधार पर सभी को आरोपी बनाकर माननीय न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया ।

प्रकरण में उल्लेखनीय है कि उक्त अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हूए प्रकरण को चिन्हित गंभीर प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था। जिसमें अन्य 5 आरोपीगण को पूर्व में आजीवन के कारावास से दण्डित किया जा चूका है। चूंकि सजा सूनाए जाने के वक्त आरोपी धमेंद्र दोषसिद्ध होने पर न्यायालय से फरार हो गया था। फरार होने के उपरांत पुलिस के द्वारा धमेंद्र का गिर0 करने के बाद माननीय न्यायालय के समक्ष पेश करने पर, फरार दोषसिद्ध आरोपी धमेंद्र पिता भारतसिंह, नि0 लसूडियाईला, जिला मंदसौर को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश रूपेश कुमार मदंसौर के द्वारा दोहरे अंधे कत्ल के आरोप मेंधारा 302 भादवि में आजीवन कारावास एवं 5000/-रूपये जुर्माने से दण्डित किया एंव धारा 395 भादवि में 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 5000/- रूपये जुर्माने से दण्डित किया गया ।

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