धार्मिक नगरी के बजाय जुर्म की मंडी के नाम से बदनाम होता मेरा शहर मंदसौर

5:41 am or May 27, 2019
धार्मिक नगरी के बजाय जुर्म की मंडी के नाम से बदनाम होता मेरा शहर मंदसौर
महावीर अग्रवाल
मंदसौर २७ मई ;अभी तक;  नगर के प्रमुख चिंतक एव ज़माज सेवी श्री कमल कोठारी ने अपने एक मार्मिक एव दिलो को छू जाने वाले लेख में कहा कि पये शहर है गुंडो का यहाँ की फिजा हैं निराली ? पिछले 6 माह से मंदसौर जो अमन शांति का टापू हुआ करता था वो शहर आज गुंडो, मवाली और हत्यारो की शरणस्थली बना हुआ है। कब, किस समय यहाँ किसकी जान चली जाए पता भी नही चलता है ?  कब किसकी हत्या किस बात को लेकर हो जाये पता ही नही चलता है? शायद ये शहर वारदातों का शहर हो गया हो।
               उन्होंने कहा की प्रहलाद बंधवार हो, अनिल सोनी हो ऐसी कितनी ही वारदाते इस शहर में पिछले 6 महीने में घटीत हो चुकी है। मानो यह शहर बलात्कार, हत्या जैसे संगीन मामलो की शरणस्थली बन गयी हो। कब किस बेटी का बलात्कार हो जाये  या अपहरण, किसी भी व्यक्ति के साथ क्या घटना घटित हो जाये कहा नहीं जा सकता। चूँकि मंदसौर शहर कई मामलो में बदनाम शहर की गिनती में देश में मशहूर हैं चाहे अफीम हो, डोडाचूरा हो या हिरोईन हो, मादक प्रदार्थ की यह नशेड़ी मंडी अब जुर्म की मंडी के नाम से भी देश में बदनाम हो चुकी हैं, जबकि भूतभावन भगवान पशुपतिनाथ की यह नगरी धार्मिक नगरी के नाम से विख्यात होना थी। कब किस बात पर किसका क़त्ल हो जाये कहा नही जा सकता हैं। मंदसौर में जिस तरह गोली की गूंज सुनाई देती है, उससे तो ऐसा लगता है इस शहर में ना तो शासन हैं और ना ही प्रशासन। क्रमवार घटना घटित होती जा रही है और प्रशासन मुख दर्शक की भूमिका में खड़ा नज़र आता है।
               उन्होंने कहा की  गोली कांड की गूंज वैसे तो पहली बार कोमल बाफना फिर बालू बावरी, अनिल त्रिवेदी, गोपाल सोनी, वीरेंद्र ठन्ना, प्रहलाद बंधवार, अनिल सोनी ऐसी दर्जनों गोलीकांड की गूंज इस क्षेत्र में सुनाई दे चुकी है जिसमें कईयो को अकाल का ग्रास बना पड़ा। धार्मिक सद्भावना और समरसता की इस पवित्र भूमि को रक्त रंजित करने वाले दोषियों पर प्रशासन सख्त कार्यवाही कर  इस शहर को बदनाम होने से बचाये शासन, प्रशासन को चाहिए कि वो बढ़ती रक्त रंजित घटनाओ पर लगाम लगावे।

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