धूल-धुआं से शहर की हवा फिर प्रदूषित, निगम के अफसरों की लापरवाही के चलते शहर हो रहा प्रदूषित

मयंक शर्मा
खंडवा १७ अप्रैल ;अभी तक; खंडवा शहर का ट्रेंचिंग ग्राउंड  में कचरा जलाने का मामला थम ही नहीं था  वहीं दूसरी ओर  शहर के विभिन्न क्षेत्रों में  लगातार  कचरू के ढेरों में आग लगाई जा रही है  शहर के बीचोबीच स्थित मच्छी बाजार में  कचरे के ढेर में किसी ने आग लगा दी आग से इतना प्रदूषित धुआं निकल रहा था कि  पूरा शहर  सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी  नगर निगम के अफसर इस प्रकार की आग लगाने पर कोई कार्यवाही नहीं करते हैं लेकिन इससे निकलने वाला धुआं शहर की जनता को को बहुत प्रदूषित कर रहा है
                  रोजाना शहर के विभिन्न चौराहों पर  कचरे के ढेर में आग लगाने का कार्य  बदस्तूर जारी है। जिम्मेदार नगर निगम और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर इससे अंजान बन रहे है।
                  कचरा जलाने से निकलती है जहरीली गैस: एसएन कॉलेज  के प्रोफेसर डॉ. दीपक गुप्ता कहते हैं, कचरा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। कचरे से निकलने वाले सफेद धुएं में वायुमंडल में बैक्टिरिया और वायरस जल्दी पनपते है। जिससे कई बीमारियां होती है। शहर से रोजाना 100 टन से अधिक कचरा शहर के 50 वार्डों में इकट्ठा कर ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाला जाता है।  निगम द्वारा कचरे को उठाकर ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाना होता है। जिसके लिए डंपर और ट्रक के माध्यम से कचरा  ट्रेचिंग ग्राउंड पर ले जाया जाता है  । निगम परिवहन का पैसा और डीजल बचाने के लिए कचरे को उठवाने की जगह आग लगाकर पैसे बचा रहा है। साथ ही निगम का ट्रेचिंग ग्राउंड भी पूरी तरह से भर जाता है और इसी का फायदा असामाजिक तत्व आग लगाकर लोगों को परेशान किया जाता है। इसलिए निगम एक महीने से ट्रेचिंग ग्राउंड में बहुत कम कचरा ले जाया जा रहा है । सूखे कचरे को जगह पर ही जला दिया जा रहा है।
जहरीले धुएं से शहर के लोग बीमार हो रहे हैं
                 वायुमंडल में मौजूद वायु हमारे लिए प्राणवायु है. इसके बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता है, लेकिन मनुष्यों ने प्राकृतिक संसाधनों का इस कदर दोहन किया है कि प्राणवायु अब जहरीली हो चली है और प्राण लेने की वजह बनने लगी है.

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