युवाओं को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा से ही होगी समाज व राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित जुहार सा.

1:10 pm or March 17, 2019
युवाओं को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा से ही होगी समाज व राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित जुहार सा.

 महावीर अग्रवाल

मंदसौर १७ मार्च ;अभी तक; राजा टोडरमलजी जयन्ती अवसर है राजा टोडरमल जी के स्थापित आदर्शों को आत्मसात करने और उन्हें चिरस्थायी बनाए रखने का। ज¨ आज के दौर में समाज के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि इसका बीड़ा युवा कांधों पर हैं। वर्तमान परिपेक्ष्य में संस्कारों की बातें गौण हुई हैं और नैतिक और सामाजिक मूल्यों का पतन हुआ है। निश्चित ही इसके लिए दोषी सिर्फ शिक्षा-दीक्षा ही नहीं अपितु अभिभावक भी हैं जिन्होंने मानसिकता यह रखी है कि हमें जो अपने बचपन में नहीं मिला वो सब हम अपने बच्चों को दें उसकी हर इच्छा पूरी करें मगर अभिभावकों की यह सोच अपने बच्चों की सारी इच्छाएँ पूरी कर उसे भौतिक सुख-सुविधा और उच्च शिक्षा तो उपलब्ध करवा पा रही है मगर अच्छी परवरिश नहीं दे पा रही जिसके चलते बच्चों में सिर्फ स्वहित की भावना ही जीवन का लक्ष्य बन चुकी है उनमें त्याग की भावना और सर्वहित की भावना का विकास हो ही नहीं पा रहा है।

युवाओं को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा से ही होगी समाज व राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित जुहार सा.

युवाओं को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा से ही होगी समाज व राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित
जुहार सा.

                    इसे समझने के लिए अगर हम गौर करेंगे तो पाएँगे कि हमारे बुजुर्गों ने हमें जो मितव्ययता, त्याग, परोपकार का पाठ पढ़ाया था वो सबक आज की पीढ़ी में देखने को नहीं मिल रहा है। वह भौतिकवादी चकाचैंध की होड़ की प्रतिस्पर्धा में इतने घिर चुके हैं कि परिवार तक से ही कटते जा रहे हैं और हमारे समक्ष चुनौती उन्हीं युवाओं को परिवार से जोड़े रखकर समाज से जुड़ने और समाज की प्रगति में भागीदार बनाने की है। ताकि युवा जिन्हें देश के कर्णधार की संज्ञा मिली हुई है वे परिवार फिर समाज और उसके बाद जिस धरा पर जन्म हुआ है राष्ट्र की प्रगति भी सुनिश्चित करने मंे भागीदार बन सकें।

                   उत्सव जीवन में नवऊर्जा का संचार करते हैं। रोजमर्रा की भागती-दौड़ती दिनचर्या से परे हमें आध्यात्मिक और संगठनात्मक रूप समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ये उत्सवों के निर्माण का मूल है। मगर अब इसकी परिभाषा सिर्फ इंजाॅय ने ले ली है। हमें हमारी युवा पीढ़ी और समाज दोनो को आध्यात्मिक, संगठनात्मक रूप से समृद्ध बनाने की ठोस  शुरूआत इसी टोडरमल जयन्ती और होली से करनी चाहिए।

वर्तमान दौर लोकतंत्र के सबसे बड़े महायज्ञ चुनाव का भी है। आनेवाले समय में देश और क्षेत्र को एक ठोस नेतृत्व मिले और इसके लिए समाज व समाज के युवा निष्पक्ष सोच के साथ अपनी भागीदारी दें।

सभी को आरोग्यपूर्ण व समृद्ध जीवन मिल्¨ इन्हीं मंगलकामनाअ¨ं के साथ राजा ट¨डरमल जयन्ती पर शुभकामनाएँ एवं बधाई  ।

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