खराब मौसम एवं प्राकृतिक आपदा से डोडे में अफीम कम आने से अफीम औसत वजन में विशेष छूट एवं भाव में बढ़ोत्तरी होना अति आवश्यक है – जाटव पूर्व डिप्टी कलेक्टर

5:18 pm or March 16, 2019
खराब मौसम एवं प्राकृतिक आपदा से डोडे में अफीम कम आने से अफीम औसत वजन में विशेष छूट एवं भाव में बढ़ोत्तरी होना अति आवश्यक है - जाटव पूर्व डिप्टी कलेक्टर
महावीर अग्रवाल
 मन्दसौर १६ मार्च ;अभी तक;  आसपास क्षेत्र में इस वर्ष ओले, बेमौसम बरसात, शीतलहर, बर्फ, पाला, बेमौसम बादल आदि से अफीम फसल को अधिक नुकसान हुआ है। इसका आंकलन मुआवजा केन्द्र सरकार अफीम कास्तकारों को देना चाहिये। मौसम परिवर्तन से अफीम किसानों के डोडे में अफीम कम आ रही है। कास्तकार डोडे से आंसू पूछ रहे है। इस साल डोडे में काली मस्सी, सफेद मस्सी भी होने से बहुत से किसानों को औसत पूरी करना मुश्किल हो रहा है, कई किसानों ने अफीम कास्त बिगड़ने से अफीम उखाड़ने एवं अफीम की खेती हांकने के आवेदन नारकोटिक्स विभाग को दे दिये है। किसान गत वर्ष के डोड़े के छिलके से भी परेशान है, जिसका भी निरारकण अभी तक नहीं हुआ है और अफीम कास्तकार की इस बहुत बड़ी समस्या का समाधान हो। कास्तकार नुकसान से परेशान व चिंतित है। इसलिये केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स विभाग द्वारा वर्तमान में पूरे देश में जो अफीम की नीति लागू हैं, इसमें निश्चित रूप से विसंगतियां एवं स्थानीय आवश्यकताओं से भिन्न है, जिसके कारण अफीम कास्त का समुचित लाभ न तो पूरे तरीके से भारत को मिल रहा है और न ही संबंधित कास्तकारों को। उत्तर प्रदेश में एक हेक्टर पर औसत (वजन) 52 कि.ग्राम तो मध्यप्रदेश में एक हेक्टर पर औसत (वजन) 58 कि.गाम है। जो पूरे देश में एक समान नारकोटिक्स अधिनिमय के प्रावधानों के विपरित है। अतः सभी प्रांतों में एक समान नीति हो। एक सामान्य न्याय हो। सरकार को महंगाई के साथ-साथ प्रांतों में भी अफीम किसानों के हित में ध्यान रखना चाहिए और अफीम के भाव बढ़ाना, 1990 से कटे हुए  अफीम के लायसेंस को बहाल करना, रबका अब 30, 40 और 50 आरी के नये पट्टे जारी होना जरूरी है। नये पट्टे पर गंभीरता के साथ सहानुभूतिपूर्वक विचार विमर्श करना चाहिये।
खराब मौसम एवं प्राकृतिक आपदा से डोडे में अफीम कम आने से अफीम औसत वजन में विशेष छूट एवं भाव में बढ़ोत्तरी होना अति आवश्यक है - जाटव पूर्व डिप्टी कलेक्टर

खराब मौसम एवं प्राकृतिक आपदा से डोडे में अफीम कम आने से अफीम औसत वजन में विशेष छूट एवं भाव में बढ़ोत्तरी होना अति आवश्यक है
– जाटव पूर्व डिप्टी कलेक्टर

यह बात पूर्व डिप्टी कलेक्टर पी.सी. जाटव ने कही। उन्होंनेे सुझाव दिया कि मंदसौर जिला सर्वाधिक अफीम उत्पादन करने वाला जिला है। इसलिये यहां नवीन अफीम की फेक्ट्री हो, डोड़ाचूरा की फेक्ट्री हो। यह मांग केन्द्रीय वित्त मंत्री, केन्द्रीय राज्य मंत्री, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थान के वित्त मंत्री एवं सांसद  मंदसौर, सांसद रतलाम, सांसद कोटा, सांसद चित्तौड़, केन्द्रीय वित्त सचिव एवं एनसी ग्वालियर, एएनसी नीमच से मांग की एवं एरिया विशेष क्षेत्र के अफीम कास्तकारों ने मांग की है कि 10 और 15 आरी के नये पट्टे मांग एवं अफीम की जांच एक ही बार हो, बार-बार न हो। अफीम गाड़ता पर विचार विमर्श और जबरन अकारण बिना सूचना दिये गये पट्टे रोके गये को इस सीजन में देने का विचार करने को कहा है एवं  बैमोसम बरसात, ठंड से जलना, पाला गिरना, ओलावृष्टि होना, नील गाय के आतंक से फसल चौपट होना आदि नुकसान का मुआवजा, क्षतिपूर्ति या अफीम औसत में छूट दी जाना यह प्रावधान किया जा ना है। अगर नारकोटिक्स विभाग के पास अमला नहीं है तो अधिकारी कर्मचारी की भर्ती पूर्ति करना आवश्यक है। अगर हम अफीम फसल के संबंध में सही नीति एवं प्रावधानों पर समीक्षा करें तो निश्चित रूप से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय को अधिक लाभ मिलेगा और प्रांतों के किसान लाभान्वित होंगे। बस आवश्यकता है गंभीर पूर्वक विश्लेषण कर नई  नीति का सही नि र्धारण हो। पुराने लायसेंस पुनः बहाल हो, नई नीति अनुसार अफीम के नये लायसेंस दिये जाने की आवश्यकता है। अतः जनहित में अफीम के भाव बढ़ाया जाना चाहिये।

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