मेघवाल समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु समिति का गठन, बंशीलाल सौलंकी अध्यक्ष बनाये गये 

12:56 pm or February 11, 2019
मेघवाल समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु समिति का गठन, बंशीलाल सौलंकी अध्यक्ष बनाये गये 
महावीर अग्रवाल
 मन्दसौर ११ फरवरी ;अभी तक;  मेघवाल समाज संघ की बैठक कोटेश्वर महादेव मंदिर सीतामऊ में संपन्न हुई। जिसमे सामूहिक विवाह सम्मलेन हेतु समिति का गठन किया गया। बैठक सामाजिक शुभ चिंतक एवं समाजसेवी कांग्रेस नेता श्री श्यामलाल जोकचंद के विशेष आतिथ्य एवं रामेश्वर राठौर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
                       उक्त जानकारी देते हुए मेघवाल संघ जिलाध्यक्ष के.सी. सोलंकी ने बताया की विवाह सम्मलेन में विवाह योग्य युवक जिसकी उम्र 21 वर्ष एवं युवती की उम्र 18 वर्ष होगी उन्ही का पंजीयन किया जावेगा। साथ ही मातृहीन व पितृहीन कन्या विकलांग कन्याओ एवं परित्यक्ता कन्याओ का विवाह सम्मलेन समिति द्वारा निशुल्क किया जावेगा। सम्मलेन का आयोजन मंदसौर में किया जावेगा। सामूहिक विवाह सम्मेलन में जितने भी जोडे़ शादी के होंगे सभी एक संविधान की प्रति और बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीर श्री राधेश्याम बसेर एवं श्री फकीरचंद चौहान की तरफ से वर वधु को भेंट की जावेगी। वर-वधु से विवाह सम्मलेन की पंजीयन राशि 11000 प्रत्येक से अलग निर्धारित की गयी।
मेघवाल समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु समिति का गठन, बंशीलाल सौलंकी अध्यक्ष बनाये गये 

मेघवाल समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु समिति का गठन, बंशीलाल सौलंकी अध्यक्ष बनाये गये

बैठक में पूर्व सरपंच श्री बंशीलाल सोलंकी टकरावद को सर्वानुमति से सामूहिक विवाह समिति का अध्यक्ष बनाया गया। साथ ही संरक्षक श्यामलाल जोकचंद, सचिव श्री गोपाल सूर्यवंशी, कोषाध्यक्ष श्री शंकरलाल राठौर को बनाया गया। समिति कार्यकारी अध्यक्ष पवन रैदास, सहसचिव विपिन चरेड़, वरदीचंद श्रीमाल, उपाध्यक्ष रामप्रसाद राठौर, शोभाराम सूर्यवंशी, राजकुमार सूर्यवंशी, प्रभुलाल जांगड़े, रोडमल रांगोठा, दिलीप कथिरिया, महासचिव आर.एन.श्रीमाल ,कैलाश कथिरिया ,राधेश्याम बसेर, शंकरलाल पंवार, डॉ महेंद्र बरोड़, हीरालाल रामगढ ,भगवान चीकला तथा तहसील अध्यक्ष विनोद सूर्यवंशी, उपाध्यक्ष दीपक बसेर  एवं समिति संयोजक श्री रामेश्वर राठौर, किशन जांगड़े, शकरलाल बामनिया के.सी.सोलंकी, खेमचंद भारती, नागूलाल चंदेल, फकीरचंद चौहान आदि को नियुक्त किया गया। बैठक का संचालन के. सी. सोलंकी ने किया एवं आभार शंकरलाल बामनिया ने माना।

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