माँ नर्मदा जयंती पर्व को लेकर मूर्तियों की स्थापना, हो रहे धार्मिक आयोजन, मिनी दशहरा की झलक

5:19 pm or February 10, 2019
माँ नर्मदा जयंती पर्व को लेकर मूर्तियों की स्थापना, हो रहे धार्मिक आयोजन, मिनी दशहरा की झलक
सलिल राय
मंडला १० फरवरी ;अभी तक; मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी मण्डला के साथ जिलेभर में पिछले बीते हफ्तेभर से 12 फरवरी को माँ नर्मदा जयंती महोउत्सव को लेकर मण्डला में जगह जगह माँ नर्मदा की प्रतिमाओं की स्थापना की गई हैं। जिले में बीते दसकों से पुण्य सलिला माँ नर्मदा जयंती मिनी दशहरा की झलक यहाँ देखने को मिल रही हैं।
माँ नर्मदा जयंती पर्व को लेकर मूर्तियों की स्थापना, हो रहे धार्मिक आयोजन, मिनी दशहरा की झलक

माँ नर्मदा जयंती पर्व को लेकर मूर्तियों की स्थापना, हो रहे धार्मिक आयोजन, मिनी दशहरा की झलक

मण्डला के बस स्टैंड में इस समय 21 फ़ीट ऊँची माँ नर्मदा की भव्य मूर्ति की स्थापना की गई हैं । मण्डला के रपटा घाट में माँ नर्मदा सेवा आरती समिति द्वार  4 फरवरी से रोजना धार्मिक आयोजन किये जा रहे हैं . नरेश कछवाहा ने बताया समिति द्वारा बीते दशकों से प्रतिदिन माँ नर्मदा की महाआरती के साथ जयंती के चलते माँ नर्मदा पुराण सुंदर कांड पाठ का संगीतमय आयोजन के साथ आज इंदोर मऊ से आई टीम ने कबीर के दोहों सखियों की मनमोहक प्रस्तुति के साथ जागरण के आयोजन हो रहे है, 12 फरवरी माँ नर्मदा जयंती को चुनरी महाआरती हवन विशाल भण्डारे के बडे आयोजन होंगे। जयंती दिवस मण्डला में  विशाल शोभा यात्राये निकलने की तैयारी यहाँ चल रही हैं।  नगर भर में ध्वनि विस्तारक यन्त्रों  से माँ नर्मदाष्टक के साथ भजनों के स्वर गूंज रहे है। इसी के साथ मण्डला में बुधवारी चौक, आजाद वार्ड, लालीपुर ,देवदरा ,महाराजपुर ,में भी माँ नर्मदा जयंती को लेकर अनेक बड़े आयोजन के साथ मनमोहक साजसज्जा के साथ रंगबिरंगी रोशनियों से माता की मूर्तियों की स्थापना की गई हैं।  स्थापना  स्थलों में दर्शनार्थियों की आवक जावक देर रात तक देखी जा रही हैं।

                मण्डला कलेक्टर ड़ॉ जगदीश चन्द्र जटिया ने माँ नर्मदा जयंती महा पर्व को लेकर उमडती जनमेदनी की सुरक्षा को लेकर डंडाधिकारियों की नियुक्ति की है। जिले के अनेक स्थानों में इस समय माँ नर्मदा जयंती से जुड़े धार्मिक लोकलुभावन आयोजन किये जा रहे हैं। जिले की घुघरी जनपद के आस्तिक चौक में माँ नर्मदा जयंती महापर्व को लेकर 8 फरवरी से सनातनी परम्परा को लेकर माँ नर्मदा की मूर्ति की स्थापना के बारे में दीपक नामदेव ने बताया कि परम्परा के चलते घुघरी में माँ नर्मदा के दर्शन के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों द्वारा माँ नर्मदा की भक्तिमय दर्शन कर रहे हैं।यहाँ जयंती दिवस को चल समारोह रामनगर तक कि यात्रा कर माँ का जल विसर्जन किया जायेगा ।
                    मध्यप्रदेश के अमरकण्टक से जलधारा के जल स्वरूप से उद्गमित शिवसुता माँ नर्मदा अपनी जलयात्रा का जलमार्ग अनोखा हैं पहाड़ो पथरीला मैदानी इलाकों को अपना जलमार्ग चुना साथ इस भूलोक में पूर्व से पश्चिम जल प्रवाह अकेली माँ नर्मदा नदी ही है।
 माँ नर्मदा प्रत्यक्ष दर्शन देती हैं जल स्वरूप में यही नही हमारे मध्यप्रदेश की माँ जीवन जलधारा हैं ।
                     पौराणिक ग्रहंतो में माँ नर्मदा का अवतरण इस धरा में माँ भागीरथी गंगा के स्वर्ग से इस भूलोक में अवतरण से पूर्व का मान्य हैं। माँ नर्मदा जन कल्याणार्थ इस लोक में अवतरित हुई ।     यही नही माँ नर्मदा के जल दर्शन से ही वही पुण्य प्रताप मिलता हैं, जो अन्य नदियों में डूबकी स्नान से, माँ नर्मदा की भक्ति आस्था के अनेक चित्रण नर्मदा घाटी में देखने और सुनने को मिलते तो है ही वही इनकी जल धारा के तीरे तीरे माँ के भक्त जिसमे न केवल हमारे देश प्रदेश के साथ विदेशी जिज्ञासु और माँ की आलौकिक गाथाओं के वशीभूत निकल पड़ते हैं हर हर नर्मदे घोष के साथ सफेद वस्त्र धारण की भेषभूषा के साथ हर नर्मदे का उच्चारण आज भी परिक्रमावासियो की पहचान हैं।   नर्मदा नदी नही वरन माता के उच्चारण के शब्दों में हर हर नर्मदे हर हर के जयघोष का गुंजायमान का स्तुतिगान समूचे नर्मदा जल प्रवाह मार्ग में सदियों से गुंजायमान हैं ,ऋषियों सन्तो दिव्य महात्माओ ने इस युग मे तप तपस्या और रिद्धि सिद्धि प्राप्ति के लिए माँ नर्मदा तट को इस युग मे फलीभूत मान्य मान्यता का जिक्र धर्म व्याख्यनो मे सुनने को मिलता हैं।
                       आधुनिकता के इस युग मे माँ नर्मदा के निर्मल नीर जो अमृत तुल्य जल को नगरों कस्बो बड़े नगरों के नर्मदा तट में कल कारखानों और सघन जन बसाहट ने मां नर्मदा के जल में तमाम नलजलमल की गंदगी सीधे माँ के जल में मिलने से माँ नर्मदा के जल में प्रदूषण एक भयावह परिदृश्य इस धरा के लिए एक बड़ा संकट अब सामने है।
 माँ नर्मदा को लेकर आस्था भक्ति के साथ इसके नाम से कही राजनीति तो कही आस्था के दर्शन भी है ।सरकारें और सचेतक जन वर्ग इस दारूण जल प्रदूषण को लेकर चिंतित तो है पर सकारात्मक पहल अब भी सामने नही हैं।
 राजनीती के भंवर जाल से राजनेताओं को अब गम्भीरता से माता के जहरीले हो रहे जल प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ कर गुजरने की मानसिकता अमल में लानी होगी तभी सच्ची माँ नर्मदा उपासना भक्ति होगी।
इस बार 12 फरवरी को माँ नर्मदा जंयती महोउत्सव में शासन प्रशासन के साथ स्वयं की सच्ची श्रद्धा पूजा में स्वयं के द्वारा माँ नर्मदा के अमृत जल को हर शक्ल के जल प्रदूषण को रोकने का संकल्प का आचमन करना ही माँ नर्मदा की सच्ची श्रद्धा भावना की पूजा होगी ।

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