धन,दौलत और वैभव सब कमाओ लेकिन जाना तो खाली हाथ और एक अर्थी पर ही है:-पं. कमल किशोर नागर

महावीर अग्रवाल
मंदसौर ११ जनवरी ;अभी तक;  शुक्रवार पशुपतिनाथ परिसर चंदरपुरा ओखाबावजी के समीप मैदान में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में पं. श्री कमलकिशोरजी नागर ने कृष्ण लीलाओं, देश की रक्षा कर रहे वीर जवानो, पुराने लोकगीत, रहन-सहन, हमारी संस्कृति और लिबास पर ध्यानकर्षण कर कथा में विभिन्न प्रसंगो को श्रवण कराया। आपने कहा कि सबकुछ भूल जाना ये मत भूलना कि आए थे तो निर्वस्त्र थे खाली हाथ आएं थे लेकिन जब जाएं तो धन, दौलत सभी वैभव कमाए और साथ में प्रभुनाम पर बिताएं पलों की गठरी जरूर साथ ले जाएं नही ंतो धन दोलत और वेभव यहीं धरे रह जाएंगे एक अर्थी होगी और खाली हाथ चले जाएंगे ।
सेना का बलिदान मानो तो एक साधू से ज्यादा ही है:- रामायण में जब रावण युद्ध हुआ तो रिछ व वानरों की सेना में उनका मुखिया प्रभु श्रीराम उनके साथ थे, महाभारत में पाण्डवो के साथ कृष्ण सारथी बन मुखिया बनकर सेना के साथ रहे  लेकिन आज देश का मुखिया अपने महलनुमा घरो में बैठा हुआ है और देश की सेना का खून बह रहा है सैनिक शहीद हो रहे है देश का मुखिया सो रहा है मेरे देश में अगर मानो तो साधु से बडा त्याग एक सैनिक का है वह देश के लिए मर जाता है मिट जाता है अपना नाम अमर कर जाता है देशभक्ति का मिसाल दे जाता है। क्या भक्ति है क्या कत्र्तव्यपरायणता है उस सैनिक की कि देश की सेवा में बर्फ ओढे खडा है विभिन्न कष्टो को सहते हुए पडा है लेकिन अपनी सेवा से विमुख नहीं है मर जाता है मिट जाता है नाम अमर कर जाता है एक सेनिक हम आप और देशवासी अगर कुछ करना चाहते है तो उस सेना और सेनिको के लिए कुछ कर दे तो जीवन धन्य हो जाएगा।
अपना पूत्र ही कहने में नही तो पिता बनना बेकार है:- पं. श्री नागर ने कथा में कहा कि आज बेटा अपने पिता के सामने हो जाता है मरने मारने पर उतर आता है ये हो क्या रहा है पूत्र ने पिता को जन्म दिया कि पिता ने पूत्र को अपना पूत्र ही अपने कहने में नही ंतो धिक्कार है ऐसे पिता पर कि उसने ऐसा खरदूषण पैदा कर छोड दिया इस जग में जीने को कि बाप को बाप ना कहे वो क्या तुम्हारी सेवा करेगा, क्या तुम्हे मुखाग्नि देगा वह तो सामने बोल-बोल कर शहस्त्रों बार मुखाग्नि दे चुका है तुम्हे जला चुका है अब तो यह सोच लो कि यह हाड मांस का पूतलानुमा शरीर लेकर घूम रहे है मर तो हम कबके चुके है । इसीलिए अब भी समय है पूत्र को छोडो, पूत्र वधू को छोड और उस प्रभु से नाता जोड लो वो तुम्हे तरा देगा तुम्हारा कल्याण कर देगा।
अपने देश की सेवा करो विदेश की नहीं:- पं. श्री नागर ने कथा में कहा कि आज बच्चा खूब पढ लिख रहा हैं और विदेश जा रहा है क्यो इसीलिए पढाया लिखाया कि हम अपनी भारतीय ज्ञान, संस्कृति को भूल जाएं विदेशी बन जाएं यह इस भारत में सर्वत्र गलत हो रहा हैं पढ लिखकर अपनी मातृभूमि के लिए कुछ कर जाओ यह भारत है कोई विदेश नहीं जो तुम्हे भूलेगा यहां तो तुम्हे युगो-युगो तक याद रखा जाएगा।
मंगल कार्यो पर हम पार्टीयां बडी शान से मना लेते है लेकिन एक बात याद रखना मनाओ तो उत्सव मनाना क्योकि उत्सव में भगवान आते है और पार्टीयों में बिगडे हुए मित्र आते है वो तुम्हे भी बिगाड देंगे । अपनी माता और गौ माता का सर्वदा सम्मान करों क्योकि मां से बडा कोई देव नहीं और गौमाता से बडा कोई दानी नहीं शास्त्रों में कहा गया है गौधूली से समस्त पाप निष्क्रीय हो जाते है। एक गाय की भी सेवा कर ली तो जीवन तर जाएगा।
सदैव सत्संग का संग करो कथा भजन श्रवण करो क्योकि एक कटोरी देशी घी हम पी नहीं सकते लेकिन एक कटोरी घी को अगर आटे में मिला दे ंतो हलवा बन जाता हैं। अपने आप को भागवत कथा, सत्संग में रमाने से इस जीवन की मिठास बढ जाएगी। भगवत श्रीकृष्ण से आपका साक्षात्कार करा देती है एक बार श्रीहरि से इंटरव्यू हो गया तो जींदगी संवर जाती है।
अपने पहनावे को छोटा ना करें धर्म घट जाता है:- पं. श्री नागर ने कहा कि आप कथा मैं जाओ सत्संग में जाओ देव दर्शन करने जाओ तो ध्यान रखना कभी वहां जींस टीशर्ट और अशोभनीय वस्त्र पहनकर मत जाना क्योकि पहनावा तुम्हारा बिगडा हुआ है और धर्म वहां आने जाने वालो का घट जाएगा। जिस प्रकार पश्चिम में सूर्यास्त होता है , पश्चिम की हवा चले तो बारिश रूक जाती है उसी प्रकार पाश्चात्य पहनावा संस्कृति क्षीण कर देता है। कुछ सिख लो उन विदेशीयों से जो अपना देश छोडकर भारत भ्रमण कर रहे है यहां की रीति नीति संस्कृति से नाता जोड रहे हैं और भारत की परंपराओ का बडे विधि-विधान से निर्वहन कर रहे है तो तुम भारतीयों को हो क्या गया है आखिर चाहते क्या हो जन्म मरण तो चालू है यह चक्र कभी रूका नहीं इसी में उलझे रह जाओगे।
अहंकार छोड दो तीन जगह बिना बुलाएं चले जाओ:- पं. श्री नागर ने कथा में कहा कि खूब धन कमाओ, वैभव कमाओ पर अपने आप को अहंकार में मत ले आना इतने बडे मत बन जाना सदैव एक बात स्मरण रखना कि भले ही बडे आदमी हो पर मृत्यु होने पर अंतिमसंस्कार में, दूसरा सत्संग,कथा में और तीसरा संकट की घडी में इन तीन जगह तो बिना बुलाएं चले जाना तो भी जीवन सार्थक हो जाएगा।
कथा स्थल पर रोज रात्रि में ओम नमोः भगवते वासुदेवाय का सामुहिक जाप निरंतर हो रहे है जिसमें मंदसौर जिला ही नहीं राजस्थान के अन्य जिलो से भी कथा श्रवण में हजारो धर्मालुजन पधार रहे है और जप कर रहे है। श्री नागर के मुखारबिंद से सुंदर भजनो के गायन पर झूम रहे
शुक्रवार को आयोजित कथा में हजारो की संख्या में धर्मालुजन उपस्थित हुए और कथा रसपान कर धर्मलाभ लिया। कथा आयोजक समिति और गोपालकृष्ण गौशाला के अध्यक्ष अनिल संचेती ने अंचल ओर ग्रामवासी ओर समस्त धर्मप्रेमी बंधू अधिक से अधिक संख्या में पधारकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की।

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