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फरियादी द्वारा रिश्वत की मांग के संबंध में झूठी गवाही देने पर होगी जेल  

प्रेम वर्मा
 राजगढ 3 दिसंबर :अभी तक : राजगढ  के  विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम  संजय श्रीवास्तव ने फरियादी लाखन सिंह  सौंधिया निवासी ग्राम तालपुरा  ने  20 मार्च 2014 को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल में शासकीय सेवक संजय शर्मा जो पटवारी के पद पर ब्यावरा तहसील  में पदस्थ था  के पास अपने पिता की करीब 26 बीघा जमीन ग्राम नापानेरा व तालपुरा की जमीन के बंटवारे की कार्यवाही के लिये रिश्वत राशि 35,000 रूपये व बही बनाने के ऐवज में रिश्वत राशि 90,000  रूपये की अवैध रूप से मांग करने के लिये लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। वह रिश्वत नहीं देना चाहता और अभियुक्त को रिश्वत राशि देते हुए ट्रेप करवाना चाहता था ।
                      विशेष लोक अभियोजक आलोक श्रीवास्तव एवम राजेश कुमार शाक्य ने बताया कि  संजय शर्मा पटवारी के विरूद्व लोकायुक्त पुलिस ने एक ट्रेप दल का गठन कर प्रथम किश्त के रूप में 5000 रूपये फरियादी लाखन सिंह से लोकायुक्त पुलिस ने  जमा करवाये और उन नोटो पर फिनाप्थलीन पावडर लगाकर फरियादी लाखन सिंह सोंधिया की शर्ट की जेब में लोकायुक्त पुलिस द्वारा रखे गये। अभियुक्त के मांगने पर मांगी जा रही रिश्वत राशि पटवारी संजय शर्मा को दिये गये। लोकायुक्त पुलिस दल ने संजय शर्मा पटवारी को 5000 रूपये की रिश्वत राशि लेते फरियादी लाखन सिंह सौंधिया से रंगे हाथो पकडा गया व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का अपराध पंजीबद्ध किया गया था ।
                       विवेचना उपरांत लोकायुक्त कार्यालय से अभियोग पत्र विचारण हेतु विशेष सत्र  न्यायालय राजगढ में प्रस्तुत किये जाने उपरांत अभियोजन की ओर से करीबन 12 से अधिक अभियोजन साक्षियों का अपने समर्थन में प्रस्तुत कर कथन करवाये गये थे । अभियुक्त द्वारा सफाई गवाह पेश किये गये।
 संजय श्रीवास्तव विशेष न्यायाधीश द्वारा निर्णय पारित करते हुए यह पाया कि प्रकरण का फरियादी लाखन सिंह सोंधिया न्यायालय में बदल गया कि उसने लोकायुक्त कार्यालय में संजय शर्मा के विरूद्व कोई भी रिश्वत राशि मांगने की शिकायत नहीं की है तथा फरियादी न्यायालय में पक्षद्रोही हो गया और उसने पटवारी संजय शर्मा के पक्ष में गवाही दी है। अभियोजन द्वारा अपने प्रकरण को साबित करने हेतु फरियादी से लगातार अनेको सूचक प्रश्न पूछे गये किन्तु फरियादी लाखन सिंह सोंधिया ने सभी तथ्यों को सिरे से खारिज कर मुकर गया और लोकायुक्त की संपूर्ण कार्यवाही को झूठा बताया। यहां तक कि उसने जो रिकार्डिंग की थी उसमें आवाज भी पहचानने से इंकार कर दिया। इस कारण  न्यायालय ने  3 दिसंबर 2018 को निर्णय पारित करते हुए पटवारी संजय शर्मा को प्रकरण में आरोपो से दोषमुक्त किया है। जबकि फरियादी लाखन सिंह सौंधिया को मामले के विचारण के दौरान मिथ्या साक्ष्य दिये जाने या न्यायिक कार्यवाही के प्रक्रम में उपयोग में लाये जाने के प्रयोजन से मिथ्या साक्ष्य गढे जाने के कारण फरियादी लाखन सिंह सौंधिया के विरूद्व कार्यवाही करने के पर्याप्त आधार अभिलेख में पाये गये।
                     उपरोक्त कारणो से विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त  संजय श्रीवास्तव प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने फरियादी के उक्त कृत्य को  गंभीरता से लेते हुए फरियादी को न्यायालय के समक्ष झूठी गवाही देने एवं अपराध का झूठा आरोप लगाये जाने के संबंध में धारा 193, 211 भा.द.वि. में दण्डित किये जाने हेतु मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद किया है। आलोक श्रीवास्तव लोक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि झूठी गवाही देने के लिये फरियादी को  7 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

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