समर्थनमूल्य पर चना खरीदी – किसानो का पोषण या शोषण, डेढ  करोड का चना घोटाला का अंदेशा

मयंक शर्मा
 खंडवा ३ दिसम्बर ;अभी तक;  सरकार किसान हित की बात करते थकती नही है लेकिन नौकरशाह स्वहित को अव्वल दर्जे पर खडाकर किसानो का शोषण में कमी नहीं कर  रहे है। सरकार के समर्थन मूल्य पर  चना खरीदी में सतही तौर पर  डेढ करोड रूपये की गडबडी सामने आई है लेकिन बोरियों मे कम  भरती और किसानो के तौल मे लूट का जोडकर देखे तो यह कई गुना है।
                    चना घोटाला प्रकाश में लाया गया है।सूत्रो ने कहा कि  खरीदी के बाद चना का परिवहन एक से दूसरी और फिर तिसरी सोसायटी को  करने के पीछे मकसद चना लदान का ट्क को लापता करना था। करीब 3 हजार क्विंटल चना को घोटाला होना पाया गया है। फिलहाल सतही जांच में  करीब डेढ करोड रूपये का 3 हजार किव्ंटल चना गोदााम में न पहुंचने की खबर है।
                     14 समितियों ने खरीदा था 2.1 अरब का चना, भंडारण में 1.31 करोड़ रु. का कम निकला जिले की 14 सहकारी समितियों के माध्यम से 19 हजार किसानों से 45 हजार 892 मिट्रिक टन चना खरीद किया गया जो 2.1 अरब की कीमत का है।  सोसायटियों द्वारा खरीदा गया चना भंडारण के लिए गोदामों में पहुंचा तो वहां 3000 क्विंटल चना कम निकला। इसकी अनुमानित कीमत करब डेढ करोड रुपए है। खरीदी से लेकर भंडारण करने वाली नोडल संस्था के कुछ अधिकारी भी बहती  गंगा में हाथ धो गये है। रबी सीजन में जिले में 10 अप्रैल से 9 जून तक जिले के पंजीकृत किसानों से 4400 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चने की खरीदी 14 सोसायटियों के माध्यम से की गई। खरीदी से लेकर भंडारण तक की जिम्मेदारी जिला विपणन संघ की थी। खरीदी खत्म होने के बाद जब उपज का भंडारण के पहले तौल हुआ तो घ्बडा घेटाला का ंदेह होने पर अंतरंग रूप े जांच शुरूकी गयी।सोसायटियों में उपज 3 हजार बोरा  कम निकली है। मामले की गंभीरता को देखते हुये जिला प्रशासन की ओर से जांच शुरू की गई है।  समितियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। चना खरीदी के दौरान भी किसानों ने कम तौल पर विरोध और हंगामा  किया था। अफसरों ने घटिया किस्म का चना जब्त कर कार्रवाई की तो पाया कि पंधाना रोड स्थित तापड़िया जीन में बने एक गोदाम से ं दूसरे जिले का चना भी भरा है।
                       सोसायटियों द्वारा खरीदा गया चना भंडारण के लिए गोदामों में पहुंचा तो वहां 3 हजार क्विंटल चना कम निकला है। किसानोे की  अपेक्षा व्यापारियो से अधिक खरीदने की शिकायते भी समांनातर  रूप से खडी है। एक व्यापारी ने कहा कि सने ही बडी मात्रा में चना  बेचा जिसे अधिकारियों ने किसानो के नाम पर दर्ज किया जबकि पटवारी से जांच कराई जाये तो किसान ने चने की फसल ली ही नही हे। खरीदी से लेकर भंडारण तक की जिम्मेदारी नोडल जेंसी होने से जिला विपणन संघ की थी। जिला सहकारी बैंक द्वारा भी हेराफेरी करने वाली समितियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
                 सूत्रों के अनुसार इस हेराफेरी में खाद्य एवं आपूर्ति, विपणन संघ सहित संबंधित विभाग के अफसर  शामिल हैं, जो जांच के घेरे में है और इनके खिलाफ एफ आई आर किये जाने की संभावना है।
0  गोदामेा में पहुुंचाया चना
चना खरीदी के बाद खंडवा के 16 गोदामों में 43 हजार 945 मिट्रिक टन,
बुरहानपुर में 6 हजार 634 मिट्रिक टन, सेंट्रल वेयर हाउस में 4 हजार 200
मिट्रिक टन, खालवा के चार गोदामों में 2 हजार 960 मिट्रिक टन, छनेरा के
तीन गोदामों में 2 हजार 200 मिट्रिक टन का भंडारण किया जाना था, लेकिन
कुछ पंजीकृत किसानों द्वारा उपज नहीं लाने से अंत तक कुल 45 हजार 892
मिट्रिक टन की ही खरीदी हो सकी।
0 ये बोले
  चना की कुल खरीदी में बडा घोटला होने की आंशका है। मामले में सहकारी
बैंक मुख्य प्रबंधक और सहकारिता उपायुक्त ने समितियों को नोटिस भी दिए
हैं, वे ही कार्रवाई भी करेंगे।
-अमित कुमार तिवारी, जिला विपणन अधिकारी
0 सोसायटियो की भी गडबडी मे भगीदारी
समितियों के माध्यम से खरीदी की गई थी। कुछ सोसायटियों ने बड़ा हेरफेर
किया है, जिनके खिलाफ जांच चल रही है। कार्रवाई के साथ पूरी राशि भी
वसूलेंगे।
-यूएन सिद्दीकी, मुख्य प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक

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