बुंदेलखंड की डायरी  सियासी सम्मान दांव पर

रवीन्द्र व्यास

 

बुंदेलखंड के सागर संभाग में इस बार 72 .73  मतदान के साथ  प्रत्याशियों का भाग्य  मशीनों में सील्ड  हो गया | सर्वाधिक मतदान  सागर जिले की खुरई विधान सभा क्षेत्र में और सबसे कम छतरपुर जिले की चंदला विधान सभा क्षेत्र में हुआ | मतों  की वृद्धि और कमी को लेकर राजनैतिक भविष्य वाणी करने वालों के अब अपने अपने  कयासों के दौर शुरू हो गए   हैं | पर इनसबके बीच  बीजेपी और कांग्रेस के कई  दिगज्जों  की सियासी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है |  राष्ट्रीय  स्तर पर अपनी सियासी पहचान बनाने वाले  कांग्रेस के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी  और केंद्रीय मंत्री उमा भारती  के  साथ  वीरेंद्र खटीक , के अलावा पूर्व  सांसद राम कृष्ण कुसमरिया  के   साथ मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव  , भूपेंद्र सिंह , जयंत मलैया , ललिता यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है | 11 दिसंबर को  आने वाले विधान सभा चुनाव परिणाम किसके यहां  खुशियों  लाएंगे और किसके यहां  मायूसी परोसेंगे इसका इन्तजार मतदातों को है | आजादी के बाद बुंदेलखंड इलाके का यह पहला चुनाव होगा  जिसमे  जातीय विद्वेष ,और नफरत के जहर को सियासी दलों के प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने समाज में जम कर घोला |

घर पर पति का शव और  मतदान  करने पहुंची पत्नी

 

बुंदेलखंड की डायरी     सियासी सम्मान दांव पर 

बुंदेलखंड की डायरी 
सियासी सम्मान दांव पर

इस बार के चुनाव में मतदाताओ में जहाँ  जबरदस्त  उत्साह  देखने को मिला  वहीँ कई गाँवों में मतदान का विरोध  भी देखने को मिला |  प्रशासनिक  लापरवाहियों  के  चलते  अनेकों मतदान केंद्रों पर मतदाता परेशान भी हुए ,तो वहीँ अफसर शाही के बेतुके फरमानो के कारण  मतदान कराने वाले कर्मचारी भी कई जगह परेशान रहे | वही कुछ ऐसे भी नज़ारे देखने को मिले जिन्होंने  दिल दिमाग को झकझोर कर रख दिया |

क्या कोई  देश भर में यह कल्पना कर  सकता है कि उसके किसी परिजन का शव घर पर रखा हो और वह  वोट डालने चला जाए ? इसका जबाब शायद यही होगा ऐसा कैसे संभव है | बुंदेलखंड के पन्ना  जिले के पवई विधान सभा क्षेत्र की एक आदिवासी महिला ने यह कर दिखाया | पुरैना गाँव के सुन्दर आदिवासी की मौत मंगल वार की रात  बीमारी के कारण हो  गई ,  मतदान के दिन उसका दाहसंस्कार  होना था |  उसकी पत्नी मुनिया बाई (५१) वा परिवार के अन्य लोगों ने तय किया की पहले मतदान करेंगे फिर अंतिम संस्कार करेंगे |  पति के शव को घर पर छोड़ कर मुनिया बाई और उसके परिवार के सदस्य  मतदान केंद्र क्र 320  पर पहुंचे और मतदान किया | गाँव में जिसने भी यह नजारा देखा हैरान रह गया ,|  कहा जा सकता है की ऐसे ही लोगो के कारण  देश में   लोकतंत्र  की मशाल  जल रही है |

सागर  संभाग की 26 विधान सभा सीटों के लिए इस बार 72.73  फीसदी मतदातों ने मतदान किया | जबकि 2013 में 69.43 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया था  पिछले  चुनाव से इस बार 3.3 फीसदी ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया | सागर जिले की 8 विधान सभा सीटों के लिए 73.35 % , टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले की 5  विधान सभा सीटों के लिए 72.78 % ,छतरपुर जिले की 6 विधान सभा सीटों के लिए 70.76 %, दमोह जिले की 4 विधान सभा सीटों के लिए 73.79 %, और पन्ना जिले की तीन विधान सभा सीटों के लिए 73 फीसदी मतदान हुआ |  छतरपुर और पन्ना जिले में  2013 के मुकाबले लगभग 5 % सागर और दमोह जिले में तीन फीसदी और  टीकमगढ़ जिले में मात्र एक फीसदी मतदान की वृद्धि 2018  के चुनाव में दर्ज की गई है |

मतदान का बहिष्कार  और पलायन

छतरपुर  जिले में चंदला और बड़ामलहरा  और चंदला विधान सभा क्षेत्र के चार गाँवों में गाँव वालों ने शुरआती दौर में मतदान का बहिष्कार किया  किन्तु बाद में प्रशासन की समझाइस के बाद मतदान किया |  टीकमगढ़  विधान सभा क्षेत्र के। तिदारी  ग्राम पंचायत  के धनवाहा गाव के लोगों ने  मतदान का बहिष्कार  किया |   इस गांव में १२०० से ज्यादा मतदाता हैं , जिनमे अधिकाँश पिछड़े और आदिवासी वर्ग से हैं |  इस पंचायत के तिदारी गाँव के  आदिवासियों  के 50  फीसदी घरो में  ताले लटक रहें हैं | जो घर खुले हैं  उनमे अधिकाँश घरों में सिर्फ बुजुर्गों और बच्चों का बसेरा है | गाँव में काम नहीं है मनरेगा ठप्प  है तो  गाँव के अधिकाँश नौजवान पेट की आग बुझाने पलायन कर गए | ये लोग  मतदान करने नहीं आये  और ना ही यहां के प्रशासन ने ऐसा कोई जतन किया की पलायन करने वाले लोग मतदान करने आएं |

दूसरी तरफ दमोह जिले में पलायन कर गए मजदूरों में बड़ी संख्या में मजदुर मतदान करने आये और अब मतदान कर वापस  लौट रहे हैं । इन्हे  मतदान के लिए कौन लाया यह एक  खोज का विषय प्रशासन के लिए हो सकता है पर दमोह इलाके के लोग जानते हैं की बाहर गए मजदूरों को वोटिंग के लिए लाने का काम धन बल धारी प्रत्याशियों ने किया है |

कैसे बचेगा राजनैतिक रसूख

राष्ट्रीय  स्तर पर अपनी सियासी पहचान बनाने वाले  कांग्रेस के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी  और केंद्रीय मंत्री उमा भारती  के  साथ  वीरेंद्र खटीक , के अलावा पूर्व  सांसद राम कृष्ण कुसमरिया  के   साथ मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव  , भूपेंद्र सिंह , जयंत मलैया , ललिता यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है |

सत्यव्रत ने अपने पुत्र नितिन चतुर्वेदी को राजनगर विधान सभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकिट पर चुनाव मैदान में उतारा था |  इस सीट पर  मुकाबला  चतुष्कोणीय  हो जाने से  हालात बदल गए हैं | सपा ,बसपा ,कांग्रेस और भाजपा  के  बीच हुए   इस मुकाबले  में  कौन जीतेगा यह कहना  आसान  नहीं रह गया है | मतों के विभाजन धन बल और बाहुबल ने इस विधान सभा के चुनाव को प्रभावित किया है |  सत्यव्रत  एक बार फिर से  चालाकी भरी  बड़ी राजनीति के शिकार हो गए हैं , जिसमे वचनो का कोई मोल  जातीयता और  सामंती व्यवस्था  के आगे बौना साबित हो जाता है |

उमा भारती ने  अपने भतीजे सिदार्थ को एक बार फिर से खरगापुर विधान सभा क्षेत्र से मैदान में उतारा |  2013 का चुनाव सिदार्थ  कांग्रेस चंदा रानी गौर से 5677 मतों से हार गए थे | इस बार  उमा भारती ने सियासी समीकरण ऐसे बनाये हैं की  खरगापुर सीट से सिदार्थ की जीत के प्रति वे पूर्णतः आश्वस्त हैं |

सागर की रहली सीट पर अपना स्थाई कब्जा समझने वाले गोपाल भार्गव 2013 का चुनाव 51765 मतों से कांग्रेस से जीते थे | पिछले चुनाव में प्रचार के लिए भी वे नहीं निकले थे , इस बार हालत कुछ अलग हैं , | अपने मतदाताओं को भगवान् मानने वाले गोपाल भार्गव को ना सिर्फ प्रचार के लिए  घर घर जाना पड़ा है बल्कि अनेकों तरह के मान मनुअल भी करना पड़ा है | हालात तो जीत के बताये जा रहें हैं पर जीत का अंतर  सिमट  रहा है |

मध्य प्रदेश सरकार में गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह  का पाला इस बार  फिर  खुरई में कांग्रेस के अरुणोदय चौबे से पड़ा है |  अरुणोदय की गिनती राजनीति के साफ़ सुथरे लोगों में होती है | भूपेंद्र सिंह पिछला चुनाव  6084 मतों से जीते थे , चुनाव जितने और मंत्री बनने के बाद उन्होंने इलाके में खूब विकाश कार्य भी कराये | विकाश कार्यों के साथ उन्होंने अपने राजनैतिक रसूख का  बेजा इस्तेमाल भी किया , जिसके  चलते दोस्तों के साथ दुश्मनो की संख्या भी खूब बड़ाई |  इस चुनाव  में उनकी  जीत के प्रति  उनके ही दल से जुड़े लोग पूर्णतः आश्वस्त नहीं हैं |

दमोह के जयंत मलैया बीजेपी के वरिष्टतम नेताओ में गिने जाते हैं | 2013  का चुनाव वे 4953 मतों से कांग्रेस के चन्द्रभान सिंह लोधी से जीते थे | लोधी बाहुल्य इस सीट से कांग्रेस ने इस बार फिर से एक लोधी  को ही प्रत्यासी बनाया है | उस पर यहां के पूर्व सांसद डॉ राम कृष्ण कुसमरिया की बगावत ने जयंत  की जीत पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है |

छतरपुर जिले की बड़ामलहरा सीट से प्रदेश सरकार की मंत्री ललिता यादव चुनाव मैदान में थी , उनका मुकाबला दमोह जिले के हिंडोरिया के प्रदुम्न लोधी से है | दरअसल  ललिता यादव ने 2008 और 2013 का चुनाव छतरपुर सीट से लड़ा था | 2013 के चुनाव में वे कांग्रेस के आलोक चतुर्वेदी से 2217 मतों से ही जीत पाई थी | हालांकि अपनी हार की समीक्षा कर ललिता यादव ने छतरपुर क्षेत्र में बड़े काम करवाए थे ,उन्हें आशा थी की उन्हें छतरपुर से ही टिकिट मिलेगी पर एन मौके पर यादव बाहुल्य बड़ामलहरा विधान सभा क्षेत्र में भेज दिया गया |  हालांकि बड़ामलहरा विधान सभा का मिजाज कांग्रेस विरोधी माना जाता है ,  साथ ही यहां हार  जीत में निर्णायक भूमिका लोधी और यादव  समाज की रहती है | इसी समीकरण पर कांग्रेस और बीजेपी ने यहां अपने प्रत्यासी मैदान में उतारे थे  | अपनी बिरादरी के साथ जो सर्व समाज का साथ लेगा यहाँ  जीत  उसी की होगी |

सियासी अनुमानों की बात करें तो सागर संभाग में कांग्रेस को  1० से 12   सीटें  बीजेपी को 8 से 10 सीटें और अन्य को  २ से 4 सीटें मिलने का अनुमान  राजनैतिक  जानकार बताते हैं \

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