सख्त कानून के बावजूद क्यो नही रुक रहे अपराध, गलती और कमी है कहा वह दूर कर उठाने होंगे कदम

महावीर अग्रवाल
  मन्दसौर  २ दिसंबर ;अभी तक;   सरकार के सख्त कानून से क्या हुआ।क्या अपराध कम हुए या अपराधों पर अंकुश लगा। जवाब देना है नेताओं को। केवल संसद या विधानसभाओ में मामले उठा देने मात्र से वे जिम्मेदारी से भाग सकते है। वे वह मामले को उठा कर मन को संतुष्ट करने वाली  वाह वाही के लिये ऐसा कर सकते है। अब समय आ गया है इस पर नेताओ को विचार कर वो व्यवस्था करना होगी जिससे जनता में भय और अविश्वास को दूर किया जा सके। वर्ना समय , ज्यादती कभी किसी को माफ नही करती है।
                      यह हमारे देश का इतिहास है। आज आप खुश हो जाए लेकिन गलतियों पर उस सर्वोच्च सत्ता के सम्मुख तो आपको भी हाजिर होना है। सरकार ने तस्करी रोकने के लिए सख्त कानून ओपियम एक्ट 9 की जगह एन डी पी एस एक्ट बनाया, महिला उत्पीड़न या रेप हत्या जैसे जघन्य अपराध पर फांसी दिये जाने और यातायात के नियमो के पालन के लिए नया मोटर व्हीकल एक्ट बनाए लेकिन हुआ क्या। वास्तव में कदम क्या उठाए जाने चाहिए जिससे देश की जनता सुखी रहे और चेन की नींद सोए।पुलिस जिस पर कानून के पालन की जिम्मेदारी रहती है वह हर किसी मामले में जनता के कटघरे में खड़ा होती है। व कभी कभी किसी मामले में जनता में प्रशंसा भी उसे मिलती है लेकिन तुलना में कम ।जनता कुछ कर नही पाती है। मनमसोस कर ज्यादतियों का घुट पीकर रह जाती है। नेता जिस पर इस प्रजातंत्र का भार है वह जिम्मेदारी से भाग रहा है। आखिर कब तक । रेप और बर्बरतापूर्ण हत्या के किस्से जनता के दिलो को हिला रहे है। हर घर चिंतित है और जिस पर जिम्मेदारी वह निश्चित है यह क्या है ।क्या पुलिस को मजबूत बनाना है। क्या अपराधियों में पुलिस का खोफ नही होने से ऐसे जघन्य अपराध ,तस्करी बेखोफ हो रही है। मेरा सुझाव है समीक्षा करे, विचार करे और देश की जनता को सुख चैन का विश्वास दे। जिम्मेदारी से भागे नही।

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