बैतूल से भी कारसेवा में शामिल हुए थे 339 युवा, एक कार सेवक की जुबानी 6 दिसम्बर की पूरी कहानी

मयंक भार्गव, बैतूल से

बैतूल १० नवंबर ;अभी तक;  अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के बाद श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया। लेकिन इसके पूर्व भी हिंदूवादी संगठनों ने कई बार अयोध्या पहुंचकर मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा (श्रमदान) किया। दिसम्बर 1992 में भी देश भर से लाखों कार सेवक अयोध्या पहुंचे थे। हालांकि 6 दिसम्बर को कारसेवकों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद ढहा दी थी। इसके बाद देश भर में हालात बेकाबू हो गए थे। लगभग 27 साल पूर्व हुई इस कारसेवा में बैतूल जिले से भी 339 कार सेवक शामिल हुए थे जो 29 नवम्बर 1992 को बैतूल से रवाना हुए थे। सभी कार सेवक 30 नवम्बर को अयोध्या पहुंचे थे।
इन्हीं कारसेवकों में से एक पूर्व विधायक एवं वर्तमान में नगर पालिका बैतूल के अध्यक्ष अलकेश आर्य ने उस समय के घटनाक्रम के जानकारी देते हुए बताया कि कड़कड़ाती ठण्ड में लगभग एक सप्ताह तक अयोध्या के पास खेतों में बने कारसेवकपुरम् में  धान की पलार पर सोकर कार सेवा की। हालांकि 6 दिसम्बर को बाबरी ढांचा ढहने के बाद हालात बिगडऩे पर सभी कारसेवक रात में खेतों से होते हुए 15 किलोमीटर पैदल चलकर फैजाबाद पहुंचे और वहां से ट्रेन से बैतूल आए।

प्रस्तुत है उस यात्रा की पूरी कहानी एक कार सेवक के रूप में अयोध्या गए नपाध्यक्ष अलकेश आर्य की जुबानी-
29 नवम्बर 1992 को सुबह विवेकानंद सभागृह बैतूल में अयोध्या जाने वाले सभी कार सेवक एकत्रित हुए। वहां सभी कार सेवकों का सम्मान करके दोपहर ट्रेन द्वारा 339 कार सेवकों के साथ प्रस्थान किया गया। इटारसी पहुंचते ही भोजन की व्यवस्था और स्वागत हुआ वहां के स्थानीय कारसेवकों के द्वारा 30 नवम्बर को रात्रि 8 बजे आयोध्या आगमन हुआ। रेलवे स्टेशन से कारसेवकपुरम पहुंचे जिसकी दूरी 3 किमी. थी। वहां खेतों में धान का पलार बिछाकर रात्रि विश्राम एवं साथ ले गए वस्त्रों से रात्रि में ठण्डी का बचाव किया गया। 1 दिसम्बर को सुबह सरयू नदी में स्नान करने के बाद सभी ने भगवान श्रीरामलला के दर्शन किए। सभी ने एक स्वर मेें नारे  लगाए बच्चा-बच्चा राम का जन्म भूमि के काम का…, रामलला हम आए हैं मंदिर यहीं बनाएंगे…जो राम लला के काम ा आए वो बेकार जवानी है, लाठी गोली खाएंगे मंदिर यहीं बनाएंगे। जो हिन्दू हित की बात करेगा वहीं देश पर राज करेगा। देश का बल बजरंग दल।

दर्शन के बाद वहां के पुजारी जी से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि 1585 से आज तक 76 बार संघर्ष हो चुका है। 77 वाँ संघर्ष होने वाला है। उन्होंने अयोध्या के इतिहास को पूरा बताया। उन्होंने बताया कि हिन्दू स्ट्रेक्चर पर ही मस्जिद बनाई थी बाबर के सेना पति मीर बांकी ने। यहां हम लोगों अंग्रेजों के आने से पहले विधि विधान से पूजा करते थे। पुजारी जी ने बताया था कि यह स्ट्रेक्चर इस्लामिक बिल्कुल नहीं है, जमीन के नीचे हिन्दुओं के प्रतीक चिन्ह  मौजूद हैं जिस समय भी खुदाई होगी निश्चित ही जमीन के नीचे से चिन्ह मिलेंगे।  उन्होंने यह भी बताया था कि यहां कभी भी नमाज नहीं होती थी। हम सभी की यही इच्छा है कि ढांचा की खुदाई हो और सत्य के आधार पर जन्म भूमि स्थान पर भव्य राममंदिर का निर्माण हो।

इसके बाद शाम तक और भी मंदिरों में हमने दर्शन किए। रात्रि वहीं उसी स्थान पर जहां ठहरने का हमारा स्थान तय था वहीं आराम किए। 2 दिसम्बर की सुबह सरयू में स्नान करके अन्य मंदिरों में दर्शन किए। भोजन बनाने की वहां कोई व्यवस्था नहीं थी। उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों से कारसेवकों के लिए ट्रकों में पैकेट भरकर आते थे। उसी से हम भोजन ग्रहण करते थे जो कि कार सेवकों द्वारा घर-घर से भोजन पैकेट मांगकर इकट्ठा किया हुआ होता था। 3-4 और 5 दिसम्बर की रात्रि तक कार सेवकों की संख्या उन्हीं खेतों में लाखों में हो गई। रात्रि में भजन कीर्तन चलते थे। सुबह व्यायाम होता था। 6 दिसम्बर को प्रात:काल उठकर स्नान के बाद कारसेवा के लिए निकल पड़े। राम जन्म भूमि के पास ही एक बड़ा मंच बना था जिस पर बड़ी संख्या में साधु-संत-विहिप के पदाधिकारी उपस्थित थे। संबोधन चल रहा रहा था कि सुबह 11 बजे अचानक से कार सेवा के लिए हम सब लोग लग गए। जो कि शाम 7 बजे तक चलते रही। साथी सभी बिछड़ चुके थे। लाखों की  भीड़ में किंतु रात्रि 11 बजे तक धीरे-धीरे ठहरे हुए स्थान पर सभी एकत्रित हो गए। निश्चित हुआ वापस घर जाना है। टेलीफोन सुविधाएं प्रभावित हो चुकी थी। ट्रेनें रद्द हो चुकी थी। अयोध्या से निकलने वाली सड़कों पर आवागमन अवरूद्ध हो चुका था। सड़कों पर पुलिस का कब्जा हो चुका था। आंसू गैस और चारों ओर लड़ाई झगड़े की आवाज आ रही थी। हमने तय किया अयोध्या से फैजाबाद जाना चाहिए और इसके लिए लगभग 15 किलोमीटर हम पैदल ही खेतों में से होते हुए सुबह-सुबह 7 दिसम्बर को फैजाबाद पहुंचे। वहां भी स्टेशन के बाहर के बूथ से मैंने बैतूल सूचना दे दी हम सभी साथ हैं और स्वस्थ्य हैं।

स्टेशन पर आने वाली ट्रेन फैजाबाद में ठहरती तो थी किंतु उसके किसी भी कोच के डिब्बो का गेट नहीं खुलता था। ट्रेनों में बैठने के लिए 11 बजे एक ट्रेन का गेट जबरदस्ती खुलवाकर सभी कार सेवक ट्रेन में बैठे। लखनऊ आने पर स्थानीय लोगों ने जय श्रीराम हो गया काम के ओजस्वी नारे के साथ भव्य स्वागत किया। यही क्रम कानपुर, झांसी तक चलता रहा। लोगों ने स्टेशनों पर मिठाईयाँ एवं भोजन की भी व्यवस्था की। बैतूल आने पर यहां कहा गया कि जितने लोग कार सेवा में गए हैं सभी भूमिगत हो जाएं फिर नागपुर में 15 दिन रहना पड़ा और बाद में स्थिति सामान्य होने पर शांति एकता, सद्भावना के लिए वातावरण बनाया गया। कार सेवा में हमारे साथ गया रामप्रसाद नागले उर्फ झिंगा अयोध्या में हमने साथ छूट जाने के कारण 15 दिन बाद बैतूल वापस आया। आज उच्चतम न्यायालय के अयोध्या में रामजन्म भूमि पर रामलला का भव्य मंदिर बनने का रास्ता साफ कर दिया जिसका हम सभी स्वागत करते हैं। निर्णय स्वागत योग्य है। निर्णय सभी समुदाय के पक्ष को ध्यान में रखकर दिया गया है।
मयंक भार्गव, बैतूल से

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