विश्व दृष्टि दिवस का आयोजन 10 अक्टूबर को

मयंक भार्गव
बैतूल, 09 अक्टूबर ;अभी तक;  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने बताया कि विश्व दृष्टि दिवस का आयोजन 10 अक्टूबर को किया जायेगा। जिसके अंतर्गत आंखों की सुरक्षा एवं आंखों से जुडे रोगों पर चर्चा की जायेगी तथा मृत्युउपरांत नेत्रदान हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।
जिला अंधत्व नियंत्रण अधिकारी डॉ. एके पांडे ने बताया कि मोतियांबिंद उम्र के साथ होने वाली बीमारी है। मोतियाबिंद किसी अन्य बीमारी जैसे मधुमेह की वजह से या चोट लगने से भी हो जाता है। यह एक ऐसा रोग है जिसमें आंख का लैंस अपारदर्शी हो जाता है, जिससे प्रकाश आंख के परदे तक नहीं पहुंच पाता है। इसके इलाज में आंख के पुराने लैंस को निकालकर कृत्रिम लैंस लगाया जाता है। मोतियाबिंद का इलाज लैंस प्रत्यारोपण जिला चिकित्सालय में पूर्णत: नि:शुल्क उपलब्ध है। मोतियाबिंद के लगातार ऑपरेशन जिले में सम्पन्न किये जा रहे है। मोतियाबिंद निवारण हेतु पाढर चिकित्सालय पाढर, सेवा सदन बैरागढ़ भोपाल, देवजी नेत्रालय चरगंवा जबलपुर एवं लायन्स क्लब नेत्र चिकित्सालय परासिया को शासन द्वारा अनुबंधित किया गया है।
इन चिकित्सालयों द्वारा समय-समय पर संपूर्ण जिले में परीक्षण शिविर लगाकर मोतियाबिंद के मरीजों को चिन्हित कर अपने चिकित्सालयों में ले जाकर नि:शुल्क ऑपरेशन किया जाता है। मरीजों के आने-जाने, रहने, भोजन एवं दवाईयों की व्यवस्था संबंधित चिकित्सालय द्वारा नि:शुल्क की जाती है।
दृष्टिहीनता का दूसरा और सबसे बड़ा कारण कांचबिंद है, जिसे ग्लूकोमा भी कहते हैं। इसमें आंख का दबाव बढ़ जाता है, जिसकी वजह से आंख का परदा खराब हो जाता है। समय रहते यदि इसका ऑपरेशन करा लिया जाये तो इसके परिणाम सकारात्मक होते हैं। यदि ग्लूकोमा का समय पर उपचार नहीं कराया गया तो नजर वापस नहीं लौटती, इसलिये इसका इलाज अतिशीघ्र करा लेना चाहिये।

वर्ष 2019 को ग्लूकोमा वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 45 वर्ष के ऊपर के सभी व्यक्तियों का आंख के दबाव की जांच की जाती है। दबाव जांचने के उपकरण सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं एवं नेत्र सहायकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि इस बीमारी के मरीज को समय रहते नुकसान होने से बचाया जा सके। कांचबिंद के ऑपरेशन के लिये शासन द्वारा बैतूल जिले का बैरागढ़ सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय से अनुबंध किया गया है, जिसके आपरेशन संबंधित संस्था में नि:शुल्क किये जाते हैं। कांच बिंद एवं मोतियाबिंद दोनों ही ऑपरेशन में संबंधित संस्था को शासन द्वारा 2000 रूपए प्रति केस अनुदान दिया जाता है।
कम नजर आने का एक कारण दृष्टिदोष भी है जिसका उपचार प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला चिकित्सालय के नेत्र कक्ष में नि:शुल्क उपलब्ध है। जिले के सभी स्कूली बच्चों का नेत्र परीक्षण कराया जा रहा है। जिन बच्चों में दृष्टिदोष पाया जाता है उन्हें जांच कर नि:शुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही बुजुर्गों को भी विजुअल एड के रूप में नेत्र परीक्षण कर नि:शुल्क चश्मा शासन द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है।

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