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सत्ता के मोह का परित्याग करना अयोध्या की परंपरा का प्रतीक

महावीर अग्रवाल
    मन्दसौर १५ अक्टूबर ;अभी तक;    भगवान श्री राम की राज्याभिषेक की पूर्ण तैयारी के बाद भी उन्हें जब वनवास मिला तो, उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया इसके साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को किसी वनवास का आदेश नहीं था किंतु लक्ष्मण, श्री राम के साथ गए, भरत ने राजा होते हुए भी पर्ण कुटी में  रहकर तथा घास के बिछौने पर सोकर 14 वर्ष तक अपना जीवन बिताया तथा शत्रुघ्न ने भी त्यागमयी जीवन व्यतीत किया।
        ठीक इसी परंपरा का निर्वाह, गरोठ विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री देवी लालजी धाकड़ ने किया है।
         श्री धाकड़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत के अधिकारी रहे हैं और हम सभी जानते हैं की भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र जी मोदी भी उनको पहचानते हैं, क्योंकि गुजरात राज्य के एक शिविर में लगभग उन्हें एक माह साथ में रहने का अवसर प्राप्त हुआ था।     प्रधानमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी देवीलाल जी को उन्होंने पहचान लिया था।
        देवी लाल जी चाहते और उनके मन में राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती तो वह आरएसएस के अखिल भारतीय नेतृत्व और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी संपर्क कर सकते थे किंतु उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं का परित्याग किया है।
         राजनीतिक क्षेत्र में  कार्य करने वाले अनेक नेताओं की कमर कब्र में लटकती रहती है, हाथ पांव धूजते रहते हैं, शरीर काम नहीं करता किंतु फिर भी वे जीवन पर्यंत अपनी महत्वाकांक्षाओं का परित्याग नहीं कर पाते तथा राजनीतिक जोड़-तोड़ से लेकर, टिकट प्राप्त करने का प्रयास करते रहते हैं ऐसे वातावरण में श्री देवीलाल धाकड़ का निर्णय एक प्रकाश स्तंभ की तरह समय पर काम आएगा।
         उनकी जीत की खुशी से भी ज्यादा आनंद आज उन्हें और हमें भी उनके घर वापसी के निर्णय से हो रहा है ।आपका स्वागत है श्री देवीलाल जी धाकड़!

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